Inquilab Ke Sathi
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Publisher Description
"भारत के स्वतंत्रता संग्राम को धार देने वाले मुख्य रूप से दो प्रकार के आंदोलन रहे हैं। पहला, तिलक-गांधी द्वारा अहिंसा और सत्याग्रह से प्रेरित तथा दूसरा, क्रांतिकारियों द्वारा बल-प्रयोग कर विदेशी शक्ति को मार भगाने की भावना से भरपूर-जिसका नेतृत्व भगत सिंह तथा चंद्रशेखर आजाद जैसे प्रखर क्रांतिकारियों ने किया। यह पुस्तक इस दूसरे प्रकार के स्वाधीनता सेनानियों पर अधिक केंद्रित है, वह भी विशेषकर काकोरी कांड के बाद की अवधि पर, क्योंकि इस काल में क्रांतिकारी आंदोलन वैचारिक रूप से परिपक्व होता जा रहा था। दूसरे चरण का उद्देश्य मात्र स्वाधीनता प्राप्त करना नहीं था, बल्कि वह था स्वतंत्र भारत की नींव रखना- ऐसा भारत, जिसमें संपूर्ण तंत्र भारतीयों द्वारा बनाया गया हो और जिसका लाभ समस्त भारतीयों को मिले। वे स्वतंत्रता चाहते थे, न कि स्वाधीनता।
इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को क्रांतिकारियों से परिचय एक सामान्य युवक के रूप में कराना है, ताकि वे हमारे भावनात्मक मित्र बन सकें। प्रस्तुत पुस्तक की विशेषता है कि इसमें संस्मरणों और उपाख्यानों को प्रमुख स्थान दिया गया है, ताकि हम अपने क्रांतिकारियों के व्यक्तित्व और मनोदशा को सही प्रकार से समझ सकें।"