Publisher Description

चंद्रकांता संतति भाग-१ बाबू देवकीनंदन खत्री द्वारा लिखित प्रसिद्ध और लोकप्रिय उपन्यास है। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में जब खड़ी बोली हिन्दी ब्रज-अवधी के चौखटे से निकल रही थी तो इस बात को लेकर संभावनाएं और कयास पुरजोर थे कि इसका स्वरूप कैसा होगा। चूँकि खड़ी बोली का न तो कोई भाषागत स्वरूप था और ना ही कोई साहित्य ही। ऐसे में बाबू देवकीनंदन खत्री का यह प्रयास काफी लोकप्रिय हुआ। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने लिखा कि ‘बहुत से लोगों ने चंद्रकांता पढ़ने के लिये हिन्दी सीखी। यह थी इस उपन्यास की लोकप्रियता। यह उपन्यास धारावाहिक ढंग में लिखा गया है। बल्कि कहना चाहिये धारावाहिक शैली इस उपन्यास की ही देन है। इस उपन्यास के छ: खंड और चौबीस भाग है। कहानी का सिलसिला लगातार जारी है। किसी एक भाग या एक खंड को पढ़ कर पाठक की प्यास नहीं बुझ सकती। इसलिये पाठक भी जब तक इसे पूरा नहीं पढ़ लेता अपने में बेचैन रहता है। यह, बतौर लेखक देवकी बाबू की सफलता थी। कथा का आधार देवकी बाबू ने राज-रजवाड़े को बनाया है लेकिन इसे रोचक और कौतुहलपूर्ण बनाने के लिये रोमांस-रहस्य, हुस्न-ऐयार की कहानियों से लबालब भरा है। पहले भाग की शुरूआत एक राजा के राज्यारोहण तथा परिवार विस्तार से होता है। लेकिन पहले ही भाग से कहानी की शाखाएं निकलती जाती हैं जिससे प्रत्येक घटना एक-दूसरे में गुथा हुआ जान पड़ता है। यहीं वजह है कि पाठक जब तक पूरा खंड समाप्त न कर ले उनकी पाठकीय प्यास नहीं बुझती। अत: निवेदन है की एक भाग को एक उपन्यास या एक किताब न समझे बल्कि पूरा चौबीस भाग मिलकर एक उपन्यास बनता है।

GENRE
Mysteries & Thrillers
RELEASED
2016
December 13
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
106
Pages
PUBLISHER
Public Domain
SELLER
Public Domain
SIZE
856.3
KB

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