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चंद्रकांता संतति भाग २१ देवकीनंदन खत्री का काफी लोकप्रिय उपन्यास है। अब तक हमने पढ़ा कि सारे कैदी चुनार के तिलिस्मी भवन में इकट्ठा किये गये हैं और उन पर मुकदमा चलाया जा रहा है। दो नकाबपोशों के माध्यम से कैदियों के पीछे का हाल बयां हो रहा है कि इसी बीच कुँवर इन्द्रजीत और आनंद सिंह तिलिस्म तोड़ कर आते हैं। जिनका कुछ हाल उन दोनों नकाबपोशों ने पहले बयान किया था। वस्तुतः वह दोनों नकाबपोश वहीँ इन्द्रजीत सिंह और आनंद सिंह है। जो पिछले कई दिनों से दरबार में पहुँच कर कैदियों के मुआमले में सबुत और दलील पेश कर रहे हैं। तिलिस्म तोड़ते हुये दोनों कुमारों की मुलाकात पाँच ऐसे कैदियों से होती है जो दारोगा की कारगुजारी से तिलिस्म के भीतर कैद है। इन्हीं कैदियों की जुबानी दारोगा और दूसरे शैतानों का हाल दोनों कुमार दरबार में दरियाफ्त करते हैं। इसके बाद महाराज, राजा और सभी ऐयार तिलिस्म की सैर के लिये जाते हैं वहाँ देखने के लिये कई अनूठी चीज है। जिसका खुलासा हाल कुँवर इन्द्रजीत सिंह सभी से कहते जाते हैं और सभी आश्चर्य से लबरेज हुये जाते हैं। यहीं पता चलता है कि इंद्रदेव जिस तिलिस्म के दारोगा है वह जमानिया, रोहतासगढ़ और चुनार के तिलिस्म को जोड़ती है। फिर इंद्रदेव के सहयोग से सभी को तिलिस्म की दूसरी अद्भुत बातें देखने-सुनने को मिलती है। दो दिन के लिये सभी इंद्रदेव के मेहमान होते हैं वहाँ भूतनाथ के रहस्य का बहुत सारा हिस्सा उजागर होता है। उसकी दूसरी पत्नी जिसने भूतनाथ के साथ धोखा किया है और उसके बेटे नानक को देश निकला की सजा दी जाती है लेकिन उसकी दुम सीधी नहीं होती। अगले अंक में हम दोनों कुमारों के विवाह का हाल बयां करेंगे।

GENRE
Mysteries & Thrillers
RELEASED
2016
December 13
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
111
Pages
PUBLISHER
Public Domain
SELLER
Public Domain
SIZE
879.3
KB

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