Publisher Description

चंद्रकांता संतति भाग-२ देवकीनंदन खत्री का लोकप्रिय उपन्यास है। इस भाग में नवगढ़ के युवराज इन्द्रजीत सिंह के गायब होने पर, उनके भाई आनंद सिंह उनकी खोज में निकलते हैं और वह भी किसी मायावी स्त्री की गिरफ्त में फँस जाते हैं। इस तरह कहानी आगे बढ़ती है, एक घटना के पीछे कई-कई राज दबे होते हैं। पात्रों का ऐसा घोलमेल दिखाई देता है कि पाठक सहज ढंग से नहीं तय कर सकते कि कौन किसके पक्ष में है, कौन शत्रु है, कौन मित्र। उपन्यास में ऐयारों की कारगुजारी ज्यादा है। ये ऐयार समय, परिस्थिति के अनुकूल अपना रूप बदल लेते हैं। जहाँ चाहे आ-जा सकते हैं। धीरे-धीरे कहानी में जितने राज्य बढ़ते जाते हैं इन ऐयारों की संख्या भी बढ़ती जाती है। चूँकि प्रत्येक राज्य के दो, चार, आठ ऐयार होते हैं। कुछ मायावी स्त्रियाँ भी हैं जो ऐयारी के फन में माहिर हैं जो किसी राज्य से नहीं जुडी हैं लेकिन कथा-क्रम के बीच में प्रवेश कर कहानी को सनसनी खेज बनाती रहती हैं। पाठक सोच में पड़ जाते हैं कि यह नया किरदार कहाँ से आ गया या किस पक्ष का है। और फिर दोगुने जोश के साथ आगे की कथा पढ़ता है। इस तरह एक-दूसरे में दाँव-घात लगाती हुई कहानी चलती है। दूसरे भाग में कुँअर आनंद सिंह रिहा हो जाते हैं लेकिन इन्द्रजीत सिंह का हाल जानने के लिये पाठक को तीसरे भाग में प्रवेश करना पड़ता है।

GENRE
Mysteries & Thrillers
RELEASED
2016
December 13
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
107
Pages
PUBLISHER
Public Domain
SELLER
Public Domain
SIZE
860.4
KB

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