Publisher Description

चंद्रकांता संतति भाग-३ देवकीनंदन खत्री का लोकप्रिय उपन्यास है। दूसरे भाग में जब युवराज इन्द्रजीत सिंह का पता चलता है तो उनके ऐयार उनकी रिहाई का उपाय सोचते हैं। इसी बीच उनकी प्रेमिका किशोरी का अपहरण भी हो जाता है। इस तरह कहानी में एक नया मोड़ आता है। देवकी बाबू ने किशोरी को वहीँ पहुँच दिया है, जहाँ इन्द्रजीत कैद है, लेकिन दोनों को एक-दूसरे का पता तब लगता है जब स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। इन्द्रजीत किशोरी को बचाते-बचाते बहुत जख्मी हो जाते हैं और किशोरी को कोई और उड़ा ले जाता है। इस तरह कथा आगे बढ़ती है, हुस्न और तिलिस्म साथ-साथ चलते हैं बल्कि धीरे-धीरे और जटिल, और कठिन होते जाते हैं। उपन्यास का केंद्र चुनारगढ़ राज्य है। इसलिये वहाँ के महाराजा, राजा और युवराज मुख्यधारा के पात्र है। बाकी घटनाएँ इन्हीं के आस-पास चक्कर लगाती है। इनके राज्य के ऐयारों की संख्या भी ज्यादा है, वो ज्यादा सक्षम ऐयार भी है। लेकिन राजा और राज्य पर चौतरफे हमले से ये हमेशा उलझे रहते हैं। किशोरी दूसरे के चंगुल से निकल कर तीसरे राजा के चंगुल में फंस जाती है। चुनारगढ़ के योद्धा, ऐयारों के साथ उसे छुड़ाने के लिये युद्ध की तैयारी करते हैं इसी बीच धोखे से युवराज इन्द्रजीत गायब कर दिये जाते हैं। आगे का हाल जानने के लिये पाठकों को अगले भाग में प्रवेश करना होगा।

GENRE
Mysteries & Thrillers
RELEASED
2016
December 13
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
102
Pages
PUBLISHER
Public Domain
SELLER
Public Domain
SIZE
859.1
KB

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