Sanatan: Darshan Va Prerna
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Beschreibung des Verlags
"सनातन धर्म केवल एक धर्म ही नहीं, बल्कि मानवीय अस्तित्व और चेतना का अनादि विज्ञान है, जोकि मनुष्य जीवन को समझने और जीवन जीने की समग्र दृष्टि प्रदान करता है। इसकी जड़ें वेदों, उपनिषदों, रामायण, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता आदि दिव्य ग्रंथों में समाहित हैं। पवित्र वेद ब्रह्मांडीय ज्ञान के मूल स्रोत हैं; उपनिषद् आत्मा और ब्रह्म की एकता का बोध कराते हैं; रामायण में भगवान् श्रीराम मर्यादा, सत्य और धर्म के प्रतीक हैं और उनका जीवन धर्म, त्याग और करुणा का आदर्श स्वरूप है।
महाभारत मानव जीवन की जटिलताओं, न्याय, कर्तव्य और कर्म के सिद्धांतों का गहन चित्रण है, जहाँ धर्म का निर्णय केवल शास्त्र से ही नहीं, बल्कि विवेक से भी होता है और गीता कर्मयोग, भक्तियोग तथा ज्ञानयोग के माध्यम से धर्म के सार, मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग को स्पष्ट करती है। सनातन धर्म हमें सिखाता है कि परम सत्य एक है, परंतु उसके रूप अनेक हैं- 'एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति।' इसका लक्ष्य है आत्मा का ब्रह्म से मिलन, जीवन में धर्म का पालन और मोक्ष की प्राप्ति। सत्य, प्रेम और करुणा पर आधारित सनातन धर्म मानव जीवन जीने का एक श्रेष्ठ शाश्वत पथ है।"