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Descripción editorial

मेरी नौका ने स्नान-घाट की टूटी-फूटी सीढ़ियों के समीप लंगर डाला। सूर्यास्त हो चुका था। नाविक नौका के तख्ते पर ही मगरिब (सूर्यास्त) की नमाज अदा करने लगा। प्रत्येक सजदे के पश्चात् उसकी काली छाया सिंदूरी आकाश के नीचे एक चमक के समान खिंच जाती।

GÉNERO
Ficción y literatura
PUBLICADO
2017
4 de junio
IDIOMA
HI
Hindi
EXTENSIÓN
33
Páginas
EDITORIAL
Sai ePublications
VENTAS
PublishDrive Inc.
TAMAÑO
497
KB

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