Dhoop Bahut Ha : धूप बहुत है
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Beschreibung des Verlags
आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैंने
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा करके
रात की धड़कन जब तक जारी रहती है
सोते नहीं हम ज़िम्मेदारी रहती है
नदी ने धूप से क्या कह दिया रवानी में
उजाले पाँव पटकने लगे हैं पानी में
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ
-राहत इंदौरी