Sathiyai Aurat
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Beschreibung des Verlags
उम्र आती गई अपने निशान छोड़ती गई साथ में कमजोरियों को भी बड़ी शिद्दत से जी-जान से ले आती गई तुम, उम्र का तकाजा कहकर स्वीकारती गई मगर अपनी कर्मठता, जीवटता और बिंदासपने को कभी नहीं छोड़ा तभी तो हर आघात हर चोट के बाद उतने ही उत्साह और नये जोश के साथ उनका सामना करती अंगूठा दिखाती