Sadguru ke Success PRINCIPLES (Hindi Edition‪)‬

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Publisher Description

सांसारिक व्यक्ति स्वयं के प्रति दयावान्, मगर दूसरों के प्रति निष्ठुर होता है। आध्यात्मिक व्यक्ति स्वयं के प्रति निष्ठुर, मगर दूसरों के प्रति दयावान् होता है। जग्गी वासुदेव सद्गुरु का वह नाम है, जो उनके माता-पिता ने उन्हें दिया। ‘सद्गुरु’ शब्द कोई पदवी नहीं है। यह एक व्याख्या है। सद्गुरु का अर्थ है—‘शिक्षित गुरु’। सद्गुरु बहुत से लोगों के लिए बहुत अलग-अलग तरह से मायने रखते हैं—गुरु, दिव्यदर्शी, योगी, मित्र, बहुत से जाने-अनजाने विषयों के सलाहकार, कवि, आर्किटेक्ट...जाने कितने चेहरे और कितने ही आयाम! सद्गुरु ने ध्यान लिंग की स्थापना की है। वे ईशा फाउंडेशन चलाते हैं। उनकी सौ से अधिक किताबें आ चुकी हैं।



जब आप सकारात्मक रहते हैं, तब नकारात्मक भावनाएँ हावी होने लगती हैं। आप हर समय सकारात्मक और खुश नहीं रह पाते। आपको बस, इतना करना है कि आप जैसा होना चाहते हैं, वैसे रहिए। कितना सरल है, पर उतना ही दूर भी है। आखिरकार, आप खुश रहना चाहते हैं तो वैसे ही रहिए। आपको कौन रोक रहा है? क्योंकि आप नहीं चाहते, वह अपना मनचाहा काम करें, लेकिन आप अपना मनचाहा काम करना चाहते हैं।



काम वैसा, जैसी परिस्थिति की माँग हो। सबकुछ आपके दिमाग में पैदा होता है। जीवन सुंदर हो जाएगा, यदि आप इसे चैतन्य होकर करते हैं। जीवन कोई फंदा नहीं है। अगर आप मन से पूछें तो वह ज्यादा-से-ज्यादा सुखद महसूस करना चाहता है। आप आनंद की सबसे ऊँची स्थिति को जानना चाहते हैं, आपको कौन रोक रहा है? पर आप अपना अधिकतर समय दूसरों के बारे में सोचने में लगा देते हैं। लोग ऐसा कर रहे हैं। अगर आप अपने होने के तरीके को स्थापित करते हैं तो आपके काम बस, हालात के हिसाब से होंगे। हम जैसे हालात में होंगे, वैसे काम करेंगे। हालात के हिसाब से काम करिए। उसके लिए आपको खुद को बदलने की जरूरत नहीं है। आप आई.टी. प्रोफेशनल बनना चाहते हैं, क्योंकि आज आप भारत में पैदा हुए, इसलिए आई.टी. प्रोफेशनल बनने की सोच रहे हैं। मान लीजिए, आप हजार साल पहले पैदा हुए होते तो आप समुद्र में मछलियाँ पकड़ने की सोच रहे होते। इस चीज को लेकर दुःख, परेशानियाँ, प्रेस्ड रहने की जरूरत नहीं है कि आप एक आई.टी. प्रोफेशनल नहीं बन पाए। काम हालात की माँग और मौजूद विकल्पों के आधार पर होने चाहिए। आप खुश रहना चाहते हैं तो आप खुश रहिए।

आप एक गाय के जितना शांत नहीं हो सकते। आप कितनी भी कोशिश कर लें। आप खाना खा लीजिए, आप शांत हो जाएँगे; पर कितनी देर? लोगों ने कोशिश की है, जरूरत से ज्यादा खाना, नशीली चीजें, शारीरिक सुखों में ज्यादा डूबना। इन सभी सुखों से अपने अंदर किसी तरह की शांति पैदा करने की कोशिश। आपको लगा कि आप वहाँ पहुँच गए, लेकिन अगले ही पल आप जानते हैं कि आप नहीं पहुँचे। कितनी बार इसने आपको धोखा दिया है। शनिवार की शाम आपने पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खाया। आपको लगता है, यही दुनिया की सबसे बड़ी खुशी है, यही सबसे अच्छा और सबसे खुशनुमा है; लेकिन अगली सुबह देखिए, स्थिति विपरीत होगी। इसलिए नहीं कि आपके परिवार के साथ गड़बड़ है। बस, इतना है कि आप एक सीमित चीज से एक असीमित आयाम बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

GENRE
Health & Well-Being
RELEASED
2022
19 July
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
22
Pages
PUBLISHER
Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
SIZE
1.6
MB

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