Ek Thug ki Dastan Ek Thug ki Dastan

Ek Thug ki Dastan

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Description de l’éditeur

700 से अधिक हत्याएँ करके अपराध के महासिन्धु में डूबा हुआ अमीर अली जेल में सामान्य बन्दियों से पृथक् बड़े ठाट-बाट से रहता था। वह साफ कपड़े पहनता, अपनी दाढ़ी सँवारता और पाँचों वक्त की नमाज अदा करता था। उसकी दैनिक क्रियाएँ नियमपूर्वक चलती थीं। अपराधबोध अथवा पश्चात्ताप का कोई चिद्द उसके मुख पर कभी नहीं देखा गया। उसे भवानी की अनुकम्पा और शकुनों पर अटूट विश्वास था। एक प्रश्न के उत्तर में उसने कहा था कि भवानी स्वयं उसका शिकार उसके हाथों में दे देती है, इसमें उसका क्या कसूर? और अल्लाह की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। उसका यह भी कहना था कि यदि वह जेल में न होता तो उसके द्वारा शिकार हुए यात्रियों की संख्या हजार से अधिक हो सकती थी। प्रस्तुत पुस्तक 'एक ठग की दास्तान' 19वीं शताब्दी के आरम्भकाल में मध्य भारत, महाराष्ट्र तथा निजाम के समस्त इलाकों में सड़क-मार्ग से यात्रा करनेवाले यात्रियों के लिए आतंक का पर्याय बने ठगों में सर्वाधिक प्रसिद्ध अमीर अली के विभिन्न रोमांचकारी अभियानों की तथ्यपरक आत्मकथा है। इसे लेखक ने स्वयं जेल में अमीर अली के मुख से सुनकर लिपिबद्ध किया है। औपन्यासिक शैली में प्रस्तुत अत्यधिक मनोरंजक आत्मकथात्मक पुस्तक।
This audiobook is presented to you in association with Rajkamal Prakashan ©Rajkamal Prakashan 2018

GENRE
Biographies et mémoires
NARRATION
ST
Samay Thakkar
LANGUE
HI
Hindi
DURÉE
23:59
h min
SORTIE
2019
15 février
ÉDITIONS
Storyside IN
TAILLE
1,2
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