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पचास कहानियाँ - मुंशी प्रेमचन्द

मुंशी प्रेमचन्द, जिसका मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, का जन्म ३१ जुलाई सन् १८८० को बनारस शहर से चार मील दूर समही गाँव में हुआ था। मुंशी प्रेमचंद भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं जिनके युग का विस्तार सन् 1880 से 1936 तक है। यह कालखण्ड भारत के इतिहास में बहुत महत्त्व का है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता-संग्राम नई मंज़िलों से गुज़रा। वे एक सफल लेखक, देशभक्त नागरिक, कुशल वक्ता, ज़िम्मेदार संपादक और संवेदनशील रचनाकार थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में काम करने की तकनीकी सुविधाएँ नहीं थीं फिर भी इतना काम करने वाला लेखक उनके सिवा कोई दूसरा नहीं हुआ। उनकी अनेक रचनाओं की गणना कालजयी साहित्य के अन्तर्गत की जाती है। ‘गोदान’ तो उनका सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है ही, ‘गबन’, ‘निर्मला’, ‘रंगभूमि’, ‘सेवा सदन’ तथा अनेकों कहानियाँ हिन्दी साहित्य का अमर अंग बन गई हैं। इनके अनुवाद भी भारत की सभी प्रमुख तथा अनेक विदेशी भाषाओं में हुए हैं।

इस पुस्तक में उनकी पचास सर्वश्रेष्ठ कहानियों का संग्रह हैं। पूर्वावलोकन फ़ाइल डाउनलोड करे और प्रथम पांच कहानियाँ नि:शुल्क पढ़ने ।

Fifty Stories – Munshi Premchand

Munshi Premchand was a famous Indian author and poet who ushered into the Modern Hindi and Urdu literature with his writings. He is one of the most celebrated writers of the Indian subcontinent, and is regarded as one of the foremost Hindi-Urdu writers of the early twentieth century. A novelist, story writer and dramatist, he has been referred to as the "Upanyas Samrat" ("Emperor of Novels") by some Hindi writers.

This book is a collection of fifty of his best short stories.

GENRE
Romans et littérature
SORTIE
2012
19 septembre
LANGUE
HI
Hindi
LONGUEUR
431
Pages
ÉDITIONS
Jasminder Sandhu
TAILLE
687
Ko

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