Antarman Ki Pati SUNO NA… Antarman Ki Pati SUNO NA…

Antarman Ki Pati SUNO NA‪…‬

    • £0.99
    • £0.99

Publisher Description

भावों की शब्दों में प्रस्तुति आंशिक रूप में ही हो पाती है। साधारणतः इस भाव सागर से प्रत्यक्ष शब्द रूप अँजुरी भर ही निकल पाता है और शेष समय और परिस्थिति के प्रभाव से अग्राह्य रह जाता है। कवि की रवि से तुलना उसकी भावों को शब्दों में रूपांतरण और कल्पना विस्तार की क्षमता के कारण ही की जाती है। जितनी यहाँ व्यापकता उतना प्रभावी सामर्थ्य ! उर्वशी जी ने यही वृहद् विस्तीर्णता मनोभावों के शाब्दिक रूपांतरण में सहजता से पिरो दी है।

विहीनता और गहनता का विस्मयकारी जुड़ाव यहाँ स्पष्टतः दृष्टव्य है। अंतर्भावों के कितने उद्वेग और परिमाण से निकली होंगी ये शब्द वाहिनियाँ ! कितने मंथन का परिणाम रहा होगा यह उत्पाद !

उर्वशी जी ने इस पुस्तक 'अंतर्मन की पाती : सुनो ना' द्वारा आधुनिक कविता के उत्परिवर्तित रूप को गहन भावों के भौतिकता में प्रकटन का माध्यम बनाया है। गंभीरता और गहनता का सरलता व स्पष्टता में अनुवाद किया है।

नारी के मनोभावों को परिभाषित करती यह कृति पाठकवृंद को भेजी एक परिष्कृत पाती है, जो सुपाठ्य व धनाढ्य है। कवयित्री ने भाषा-सौंदर्य, वैशिष्ट्य व समृद्ध साहित्यिक परंपरा का निर्वहन किया है। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में विभिन्न भाषा-शैलियों का प्रयोग लेखन परिपक्वता का परिचायक है।

GENRE
Fiction & Literature
RELEASED
2024
1 October
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
85
Pages
PUBLISHER
Prabhat Prakashan
SIZE
20.7
MB