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Descrizione dell’editore

एक दिन और एक रात लगातार चलने के बाद दूसरे दिन वे सूरज उदय होने के साथ-ही भरतपुर की सरहद में दाखिल हो गए। वाकई देवसिंह की तिलस्मी दवा ऐसी कारगार साबित हुई कि उसने इतने कम वक्त में ही जख्मों को तकरीबन खत्म ही कर दिया था। एक ही घोड़े पर सवार होकर देव और कांता ने सारा रास्ता तय किया था। इस सफर में उनके बीच की मुहब्बत और बढ़ गई। कांता के दिल में अपने पिता और देवसिंह की दुश्मनी की बात भी अब धूमिल-सी पड़ती जा रही थी। वह सोच रही थी कि जब पिताजी को यह पता लगेगा कि देवसिंह किस तरह उसे उन जालिमों के फंदे से अपनी जान पर खेलकर निकाल लाया है तो वे सारी दुश्मनी भूल जाएंगें और देवसिंह के अहसानमंद होंगे। बातों-ही-बातों में दोनों एक-दूसरे की मुहब्बत का इकरार कर चुके थे। न जाने किन-किन ख्यालों को सजाए कांता भरतपुर की तरफ बढ़ रही थी। - इसी उपन्यास से

GENERE
Misteri e gialli
PUBBLICATO
2014
1 maggio
LINGUA
HI
Hindi
PAGINE
120
EDITORE
Bhartiya Sahitya Inc.
DIMENSIONE
723.3
KB

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