Dhoop Bahut Ha : धूप बहुत है Dhoop Bahut Ha : धूप बहुत है

Dhoop Bahut Ha : धूप बहुत ह‪ै‬

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Descrizione dell’editore

आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैंने


चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा करके


रात की धड़कन जब तक जारी रहती है


सोते नहीं हम ज़िम्मेदारी रहती है


नदी ने धूप से क्या कह दिया रवानी में


उजाले पाँव पटकने लगे हैं पानी में


बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर


जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ



-राहत इंदौरी

GENERE
Narrativa e letteratura
PUBBLICATO
2017
5 gennaio
LINGUA
HI
Hindi
PAGINE
128
EDITORE
Diamond Pocket Books
DATI DEL FORNITORE
diamond pocket books pvt ltd
DIMENSIONE
573,2
KB