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Descripción de editorial

समय ने सिद्ध किया कि गांधी जी का 'सत्यमेव जयते' तभी संभव है जब सावरकर के 'शस्त्रमेव जयते' को प्राथमिकता दी जाएगी, 'बुद्ध' तभी उपयोगी हो सकते हैं जब अपने सम्मान के लिए 'युद्ध' की परिकल्पना को भी आवश्यक माना जाएगा। 'सत्याग्रह' भी तभी सफल होगा जब उसके साथ सावरकर का 'शस्त्रग्रह' आ जुड़ेगा।



गांधी जी सत्यमेव जयते तक टिके रहे, बुद्ध की बात करते रहे और सत्याग्रह को अपना हथियार मानते रहे। पर 'सावरकर सत्यमेव' जयते से आगे 'शस्त्रमेव जयते' को, 'बुद्ध की रक्षार्थ युद्ध' को और सत्याग्रह से अधिक शस्त्रग्रह को उपयोगी मानते रहे। इन दोनों महापुरुषों में ये ही मौलिक अंतर था।



उत्तर प्रदेश के जनपद गौतम बुद्ध नगर के गाँव महावड में जन्मे पुस्तक के लेखक राकेश कुमार आर्य तीन दर्जन से अधिक पुस्तकों के लेखक व दैनिक 'उगता भारत' के संपादक हैं और कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं। उनके लेख देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं ।



प्रस्तुत पुस्तक में ‘गांधी और सावरकर’ के व्यक्तित्व और कृतित्व का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए ऐसे ही अनेकों तथ्यों को उकेरने का सफल प्रयास किया गया है। जिन्हें आज की युवा पीढ़ी को समझने की आवश्यकता है।

GÉNERO
Historia
PUBLICADO
2016
diciembre 16
LENGUAJE
HI
Hindi
EXTENSIÓN
157
Páginas
EDITORIAL
Diamond Pocket Books
VENDEDOR
diamond pocket books pvt ltd
TAMAÑO
1.1
MB

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