इतना भर प्रेम इतना भर प्रेम

इतना भर प्रे‪म‬

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Publisher Description

कहा जाता है कि निराशा की चोट आशा के स्रोत का पता बताती है और विफल इच्छाओं की छटपटाहट यथार्थ से परिचय कराती है। बस आवश्यकता होती है तो सावधानी से सकारात्मक सोच को, सकारात्मक शब्दों को सुनने और चुनने की।ऐसे ही तीन जादुई शब्द हैं, "यह संभव है", जिनके कारण मैं अपने लेखों के संग्रह को एक पुस्तक का आकार दे पाई। "इतना भर प्रेम" मात्र मेरी पुस्तक का नाम नहीं बल्कि यह मेरा प्रेम अपने लेखन के प्रति, दूसरों तक रचनाओं के माध्यम से पहुंचने के प्रति, समाज के प्रति, समाज के विभिन्न वर्गों के प्रति, सुविधाविहीन, साधनविहीन, जरूरतमंदों के प्रति, इस समष्टि में उपस्थित प्रकृति, मानव व अन्य जीवों के प्रति है।
कहा जाता है कि निराशा की चोट आशा के स्रोत का पता बताती है और विफल इच्छाओं की छटपटाहट यथार्थ से परिचय कराती है। बस आवश्यकता होती है तो सावधानी से सकारात्मक सोच को, सकारात्मक शब्दों को सुनने और चुनने की।ऐसे ही तीन जादुई शब्द हैं, "यह संभव है", जिनके कारण मैं अपने लेखों के संग्रह को एक पुस्तक का आकार दे पाई। "इतना भर प्रेम" मात्र मेरी पुस्तक का नाम नहीं बल्कि यह मेरा प्रेम अपने लेखन के प्रति, दूसरों तक रचनाओं के माध्यम से पहुंचने के प्रति, समाज के प्रति, समाज के विभिन्न वर्गों के प्रति, सुविधाविहीन, साधनविहीन, जरूरतमंदों के प्रति, इस समष्टि में उपस्थित प्रकृति, मानव व अन्य जीवों के प्रति है।

GENRE
Fiction & Literature
RELEASED
2020
October 15
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
111
Pages
PUBLISHER
वर्जिन साहित्यपीठ
SELLER
Draft2Digital, LLC
SIZE
273.8
KB
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