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Publisher Description

 टोकरी भर रात लेकर, मैं चली अब चाँद लेने।  “धूप और छाँव के बीच” एक बहते समंदर की तरह है और इस किताब में आपको हर तरह की भावनाओं में डूबने और डूब कर किनारों पर आकर ठहरने का अनुभव मिलेगा। किताब में आप जैसे-जैसे गहराई में डुबकी लगायेंगे, तो आप कभी धूप में, कभी छाँव में और कभी-कभी धूप-छाँव के बीच ख़ुद को अपनी ही दुनिया में पाएंगे। कभी आप मोहब्बत में उड़ान भरते परिंदे तो कभी बेवफाई और विरह में प्यास से दम तोड़ते पपीहे सा महसूस करेंगे। जैसे ही आपको लगेगा आपने पूरी दुनिया जीत ली है वैसे ही एक नई ख़्वाहिश का जन्म होगा और आप फिर नींद से जाग उठेंगे। आप अपनी ख़्वाहिशों का कोई अंत न होने की वजह से फिर से हारा हुआ महसूस करेंगे। उसी बीच फिर एक पंक्ति आयेगी जो आपको कुछ पल के लिए मौन कर देगी। पूरी किताब जैसे किसी फुलवारी के सबसे ख़ास चुने हुए फूलों की तरह लिख कर सजाई गई है और हर कविता की एक अपनी अलग खुशबू और पहचान है । कुछ पन्नों पर आपको इस देश के आज़ाद होने के बाद भी महिलाओं पर हो रही तानाशाही की चीखें सुनाई देगी तो कहीं पर प्रकृति पर हो रहे जुर्मों के खिलाफ़ बग़ावत की आग दिखाई देगी। हर पन्ने पर भावनाओं को इतनी खूबसूरती से तराशा गया है कि आपको लेखिका के बचपन के गाँव, पहाड़ों की वादियों से लेकर शहर तक का तजुर्बा बेहद ही बारीकी से महसूस होगा। क्यूँ न इस पल अपनी मंज़िल की तरफ आगे बढ़ते हुए, आसमान के और क़रीब वाली दुनिया का एहसास “धूप और छाँव के बीच” राह में थोड़ा सा ठहर कर महसूस किया जाए।  “ज़रा सा ठहर जा राही, चला है दूर तक तू कहीं थक कर न खो दे, तू मंज़िल की जुस्तजू।।“

GENRE
Fiction & Literature
RELEASED
2021
February 2
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
166
Pages
PUBLISHER
Notion Press
SELLER
Notion Press Media Private Limited
SIZE
920.6
KB