प्रारब्ध और पुरुषार्थ प्रारब्ध और पुरुषार्थ

प्रारब्ध और पुरुषार्थ‪ ‬

Prarabdh_Aur_Purusharth

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Publisher Description

प्रारब्ध है पूर्व जन्म के कर्मों का फल। फल तो भोगना ही पड़ता है, परन्तु पुरुषार्थ से उसकी तीव्रता को कम किया जा सकता है अथवा यह भी कह सकते हैं कि उसको सहन करने की शक्ति बढ़ाई जा सकती है। ‘‘प्रारब्ध और पुरुषार्थ’’ का यही कथानक है। अकबर के जीवन के एक पृष्ठ को आधार बनाकर रचा गया अत्यन्त रोचक उपन्यास। मनुष्य कर्म करने में स्वतन्त्र है। इस कारण भाग्य (प्रारब्ध) के विरुद्ध जब वह पुरुषार्थ करता है तो उसके परिणाम (शुभ अथवा अशुभ) का उत्तरदायित्व उसका अपना होना है। तब वह भाग्य पर दोषारोपण नहीं कर सकता। ‘प्रारब्ध और पुरुषार्थ’ का यही कथानक है।

GENRE
Fiction & Literature
RELEASED
2012
February 25
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
160
Pages
PUBLISHER
Bhartiya Sahitya Inc.
SELLER
Bhartiya Sahitya Inc.
SIZE
1.1
MB
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