मनःस्थिति बदलें तो परिस्थिति बदले (Hindi Self-help) मनःस्थिति बदलें तो परिस्थिति बदले (Hindi Self-help)

मनःस्थिति बदलें तो परिस्थिति बदले (Hindi Self-help‪)‬

Manah Sthiti Badlen To Paristhiti Badle (Hindi Self-help)

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Publisher Description

संसार में चिरकाल से दो प्रचण्ड-धाराओं का संघर्ष होता चला आया है। इसमें से एक की मान्यता है कि अपेक्षित साधनों की बहुलता से ही प्रसन्नता और प्रगति संभव है। इसके विपरीत दूसरी विचारधारा यह है कि मनःस्थिति ही परिस्थितियों की जन्मदात्री है। उसके आधार पर ही साधनों का आवश्यक उपार्जन और संयोजनों के लिए सदुपयोग बन पड़ता है। वह न हो, तो इच्छित वस्तु पर्याप्त मात्रा में रहने पर भी अभाव और असंतोष पनपता दीख पड़ता है। एक विचारधारा कहती है कि यदि मन को साध सँभाल लिया जाए, तो निर्वाह के आवश्यक साधनों में कमी कभी नहीं पड़ सकती। कदाचित् पड़े भी, तो उस अभाव के साथ संयम, सहानुभूति, संतोष जैसे सद्गुणों का समावेश कर लेने पर जो है, उतने में ही भली प्रकार काम चल सकता है। कोई अभाव नहीं अखरता। दूसरी का कहना है कि जितने अधिक साधन, उतना अधिक सुख। समर्थता और संपन्नता होने पर दूसरे दुर्बलों के उपार्जन-अधिकार को भी हड़प कर मन चाहा मौज-मजा किया जा सकता है।

GENRE
Health, Mind & Body
RELEASED
2014
January 6
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
32
Pages
PUBLISHER
Bhartiya Sahitya Inc.
SELLER
Bhartiya Sahitya Inc.
SIZE
220.2
KB
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