Publisher Description

वरदान प्रेमचन्द द्वारा लिखित उपन्यास है। प्रेमचन्द हिन्दी कथा-परम्परा में सामाजिक दृष्टि के प्रतिष्ठापक कथाकार रहे हैं। पहली बार प्रेमचन्द ने ही कथा की दिशा को कस्बों और गांवों की तरफ मोड़ा था। वरदान इनके प्रारंभिक दौर का उपन्यास है। उस समय प्रेमचन्द की दृष्टि में, अपने लेखन के माध्यम से, एक उच्च आदर्श की प्रतिष्ठा करना था। इसी सामाजिक-आदर्श प्रतिष्ठा में उन्होंने सेवासदन, वरदान जैसे उपन्यास और नमक का दारोगा जैसी कहानियाँ लिखी। वरदान में भी सांसारिकता से वैराग्य की ओर प्रस्थान की कहानी है। ध्यान रहे इस वैराग्य में सांसारिकता का त्याग है संसार का नहीं। कथा का नायक प्रताप कालेज की शिक्षा प्राप्त करने के बाद संन्यासी हो जाता है। लेकिन उसकी संन्यास साधना मातृभूमि की सेवा के लिये है। उसकी सेवा, त्याग और तपस्या सब जननी जन्मभूमि के गौरव के लिये है। उसने जीवन में यह कठिन व्रत जननी के उन असहाय, निरुपाय संतानों के लिये लिया है, जिसकी दशा जननी से देखी नहीं जाती। अपनी गृहस्थी बिगाड़ कर या बसने के पहले ही उजाड़ कर दूसरे बंधुओं की गृहस्थी दुरुस्त करना बहुत साहस का कम है। इसलिये भी यह कार्य एक उच्च आदर्श लगता है। वस्तुतः जिस दौर में प्रेमचन्द इस तरह के उपन्यास लिख रहे थे, वह समय ही इस तरह के त्यागों से भरा था, समाज की माँग तो थी ही। गुलामी से आजादी की रस्सा-कस्सी में जितने सद्व्यवहार आचरण की आवश्यकता थी उतने ही कठोर त्याग और साधना की भी। प्रेमचन्द ने देश आजादी के अनुष्ठान में त्याग-साधना की प्रतिष्ठा की है इस उपन्यास के माध्यम से।

GENRE
Fiction & Literature
RELEASED
2016
December 13
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
199
Pages
PUBLISHER
Public Domain
SELLER
Public Domain
SIZE
1.2
MB

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