Ghat Ka Patthar
घाट का पत्थर
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Publisher Description
उसका हृदय जोर-जोर से धड़क रहा था। उसके हाथ तेजी से रेशमी वस्त्रें पर चल रहे थे। हाथ और शरीर की रगड़ से एक आग-सी उत्पन्न हो रही थी जिससे उसका हाथ जलने-सा लगा, परंतु इस जलन में भी उसे एक आनंद का अनुभव हो रहा था।‘यदि तुम लड़की होते तो अंदर हाथ डालकर सहलाने को कहती।’
-इसी उपन्यास में से