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सरदारजबभोजनकेपश्‍चात्विश्रामकररहेथेतबअचानकघनश्यामदासबिड़लाआपहुँचे।विश्रामकेबादसरदारबैठककक्षमेंआएतबघनश्यामदासजीउनकीप्रतीक्षाकररहेथे।कलगांधीजीकेसाथउनकीजोमुलाकातनिश्चितहुईथी;उसकेबारेमेंसरदारबिड़लाजीकोजानकारीदेनाचाहतेथे।पिछलेकुछदिनोंमेंजोघटनाएँघटितहुईथीं;उनकीवैसेतोबिड़लाजीकोजानकारीथीही।बापूकेउपवाससमाप्तहोगए;उसकेविषयमेंजबबिड़लाजीनेराहतकीभावनाव्यक्तकीतबसरदारनेकहा—

‘‘बिड़लाजी;इसउपवाससेसांप्रदायिकतनावशांतहोगयाहै;क्याऐसाकोईमानसकताहै।’’इतनाकहकरउन्होंनेथोड़ीदेरपहलेहीउनकेपासआएहुएनिर्वासितोंकेसमूहद्वारावर्णितउनकेअनुभवकीबातबताई।‘‘इनलोगोंकोहमशरणार्थियोंकेशिविरमेंपशुओंकेसमानबंदकरदें?विशेषरूपसेजबयहाँसेपाकिस्तानचलेगएमुसलमानोंकेमकानबंदपड़ेहोंऔरविशालमसजिदेंबिलकुलखालीहोंतबयेनिर्वासितकैसेशांतरहसकतेहैं?’’

‘‘आपसहीकहरहेहैं;सरदार!’’बिड़लाजीनेकहा;‘‘बापूकेउपवाससेकिसीकाहृदयपरिवर्तनहुआहो;ऐसालगतातोनहीं।’’

‘‘क्योंकिउपवासकेलिएयहबिलकुलगलतसमयथा।’’सरदारनेकहा।

—इसीउपन्याससे


लौहपुरुषसरदारपटेलकेजीवनकेजाने-अनजानेप्रसंगोंकोउद्घाटितकरतारोचकउपन्यासजोउसमहामानवकेअटलविश्वासऔरअद्‍भुतजिजीविषाकादिग्दर्शनकराताहै।

GENRE
Fiction & Literature
RELEASED
2020
November 11
LANGUAGE
HI
Hindi
LENGTH
476
Pages
PUBLISHER
Prabhat Prakashan Pvt Ltd
SELLER
Prabhat Prakashan Private Limited
SIZE
1.8
MB

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